इस प्रकार दैत्योंने निरीह प्रजाका बड़ा उत्पीड़न किया। उस समय देवतालोग स्वर्ग छोड़कर छिपे रूपसे पृथ्वीमें विचरण करते थे॥ १६॥✎ 20172018
एवं विप्रकृते लोके दैत्येन्द्रानुचरैर्मुहुः।
दिवं देवाः परित्यज्य भुवि चेरुरलक्षिताः॥ १६
इस प्रकार दैत्योंने निरीह प्रजाका बड़ा उत्पीड़न किया। उस समय देवतालोग स्वर्ग छोड़कर छिपे रूपसे पृथ्वीमें विचरण करते थे॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.2.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 812) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/2/16/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)