श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.2.18

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

शकुनिं शम्बरं धृष्टं भूतसन्तापनं वृकम्।

कालनाभं महानाभं हरिश्मश्रुमथोत्कचम्॥ १८

śakuniṃ śambaraṃ dhṛṣṭaṃ bhūtasantāpanaṃ vṛkam|

kālanābhaṃ mahānābhaṃ hariśmaśrumathotkacam|| 18

अर्थ

युधिष्ठिर! भाईकी मृत्युसे हिरण्यकशिपुको बड़ा दुःख हुआ था। जब उसने उसकी अन्त्येष्टि क्रियासे छुट्टी पा ली, तब शकुनि, शम्बर, धृष्ट, भूतसन्तापन, वृक, कालनाभ, महानाभ, हरिश्मश्रु और उत्कच अपने इन भतीजोंको सान्त्वना दी॥ १७-१८॥

यह अर्थ श्लोक 17–18 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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