sapatnairghātitaḥ kṣudrairbhrātā me dayitaḥ suhṛt|
pārṣṇigrāheṇa hariṇā samenāpyupadhāvanaiḥ|| 6
अर्थ
तुम्हें यह ज्ञात है कि मेरे क्षुद्र शत्रुओंने मेरे परम प्यारे और हितैषी भाईको विष्णुसे मरवा डाला है। यद्यपि वह देवता और दैत्य दोनोंके प्रति समान है, तथापि दौड़-धूप और अनुनय-विनय करके देवताओंने उसे अपने पक्षमें कर लिया है॥ ६॥✎ 580
सपत्नैर्घातितः क्षुद्रैर्भ्राता मे दयितः सुहृत्।
पार्ष्णिग्राहेण हरिणा समेनाप्युपधावनैः॥ ६
तुम्हें यह ज्ञात है कि मेरे क्षुद्र शत्रुओंने मेरे परम प्यारे और हितैषी भाईको विष्णुसे मरवा डाला है। यद्यपि वह देवता और दैत्य दोनोंके प्रति समान है, तथापि दौड़-धूप और अनुनय-विनय करके देवताओंने उसे अपने पक्षमें कर लिया है॥ ६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.2.6 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 811) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/2/6/