॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 7.3.13
तवासनं द्विजगवां पारमेष्ठ्यं जगत्पते।
भवाय श्रेयसे भूत्यै क्षेमाय विजयाय च॥ १३
tavāsanaṃ dvijagavāṃ pārameṣṭhyaṃ jagatpate|
bhavāya śreyase bhūtyai kṣemāya vijayāya ca|| 13
अर्थ
ब्रह्माजी! आपका यह सर्वश्रेष्ठ परमेष्ठि-पद ब्राह्मण एवं गौओंकी वृद्धि, कल्याण, विभूति, कुशल और विजयके लिये है। (यदि यह हिरण्यकशिपुके हाथमें चला गया, तो सज्जनोंपर संकटोंका पहाड़ टूट पड़ेगा)’॥ १३॥