॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 7.3.33
व्यक्तं विभो स्थूलमिदं शरीरं
येनेन्द्रियप्राणमनोगुणांस्त्वम् ।
भुङ्क्षे स्थितो धामनि पारमेष्ठ्ये
अव्यक्त आत्मा पुरुषः पुराणः॥ ३३
vyaktaṃ vibho sthūlamidaṃ śarīraṃ
yenendriyaprāṇamanoguṇāṃstvam |
bhuṅkṣe sthito dhāmani pārameṣṭhye
avyakta ātmā puruṣaḥ purāṇaḥ|| 33
अर्थ
प्रभो! यह व्यक्त ब्रह्माण्ड आपका स्थूल शरीर है। इससे आप इन्द्रिय, प्राण और मनके विषयोंका उपभोग करते हैं। किन्तु उस समय भी आप अपने परम ऐश्वर्यमय स्वरूपमें ही स्थित रहते हैं। वस्तुतः आप पुराणपुरुष, स्थूल-सूक्ष्मसे परे ब्रह्मस्वरूप ही हैं॥ ३३॥