श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.3.38

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

सर्वेषां लोकपालानां महिमानं यथाऽऽत्मनः।

तपोयोगप्रभावाणां यन्‍न रिष्यति कर्हिचित्॥ ३८

sarveṣāṃ lokapālānāṃ mahimānaṃ yathā''tmanaḥ|

tapoyogaprabhāvāṇāṃ yanna riṣyati karhicit|| 38

अर्थ

इन्द्रादि समस्त लोकपालोंमें जैसी आपकी महिमा है, वैसी ही मेरी भी हो। तपस्वियों और योगियोंको जो अक्षय ऐश्‍वर्य प्राप्त है, वही मुझे भी दीजिये॥ ३८॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां सप्तमस्कन्धे
हिरण्यकशिपोर्वरयाचनं नाम तृतीयोऽध्यायः
॥ ३॥

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