श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.4.37

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

न्यस्तक्रीडनको बालो जडवत्तन्मनस्तया।

कृष्णग्रहगृहीतात्मा न वेद जगदीदृशम्॥ ३७

nyastakrīḍanako bālo jaḍavattanmanastayā|

kṛṣṇagrahagṛhītātmā na veda jagadīdṛśam|| 37

अर्थ

युधिष्ठिर! प्रह्लाद बचपनमें ही खेल-कूद छोड़कर भगवान्‌के ध्यानमें जडवत् तन्मय हो जाया करते। भगवान् श्रीकृष्णके अनुग्रहरूप ग्रहने उनके हृदयको इस प्रकार खींच लिया था कि उन्हें जगत‍्की कुछ सुध-बुध ही न रहती॥ ३७॥

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