श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.4.44

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

युधिष्ठिर उवाच

देवर्ष एतदिच्छामो वेदितुं तव सुव्रत।

यदात्मजाय शुद्धाय पितादात् साधवे ह्यघम्॥ ४४

devarṣa etadicchāmo vedituṃ tava suvrata|

yadātmajāya śuddhāya pitādāt sādhave hyagham|| 44

अर्थ

युधिष्ठिरने पूछा—नारदजी! आपका व्रत अखण्ड है। अब हम आपसे यह जानना चाहते हैं कि हिरण्यकशिपुने पिता होकर भी ऐसे शुद्धहृदय महात्मा पुत्रसे द्रोह क्यों किया॥ ४४॥

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