इस प्रकार गुरुजीने तरह-तरहसे डाँट-डपटकर प्रह्लादको धमकाया और अर्थ, धर्म एवं कामसम्बन्धी शिक्षा दी॥ १८॥
इति तं विविधोपायैर्भीषयंस्तर्जनादिभिः।
प्रह्रादं ग्राहयामास त्रिवर्गस्योपपादनम् ॥ १८
इस प्रकार गुरुजीने तरह-तरहसे डाँट-डपटकर प्रह्लादको धमकाया और अर्थ, धर्म एवं कामसम्बन्धी शिक्षा दी॥ १८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.5.18 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 830) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/5/18/