श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.6.4

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

तत्प्रयासो न कर्तव्यो यत आयुर्व्ययः परम्।

न तथा विन्दते क्षेमं मुकुन्दचरणाम्बुजम्॥ ४

tatprayāso na kartavyo yata āyurvyayaḥ param|

na tathā vindate kṣemaṃ mukundacaraṇāmbujam|| 4

अर्थ

इसलिये सांसारिक सुखके उद्देश्यसे प्रयत्न करनेकी कोई आवश्यकता नहीं है। क्योंकि स्वयं मिलनेवाली वस्तुके लिये परिश्रम करना आयु और शक्तिको व्यर्थ गँवाना है। जो इनमें उलझ जाते हैं, उन्हें भगवान्‌के परम कल्याणस्वरूप चरणकमलोंकी प्राप्ति नहीं होती॥ ४॥✎ 589

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #589 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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