॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 7.7.44
किमु व्यवहितापत्यदारागारधनादयः।
राज्यं कोशगजामात्यभृत्याप्ता ममतास्पदाः॥ ४४
kimu vyavahitāpatyadārāgāradhanādayaḥ|
rājyaṃ kośagajāmātyabhṛtyāptā mamatāspadāḥ|| 44
अर्थ
जब शरीरकी ही यह दशा है—तब इससे अलग रहनेवाले पुत्र, स्त्री, महल, धन, सम्पत्ति, राज्य, खजाने, हाथी-घोड़े, मन्त्री, नौकर-चाकर, गुरुजन और दूसरे अपने कहलानेवालोंकी तो बात ही क्या है॥ ४४॥