मुमूर्षूणां हि मन्दात्मन् ननु स्युर्विप्लवा गिरः॥ १२
vyaktaṃ tvaṃ martukāmo'si yo'timātraṃ vikatthase|
mumūrṣūṇāṃ hi mandātman nanu syurviplavā giraḥ|| 12
अर्थ
हिरण्यकशिपुने कहा—रे मन्दबुद्धि! तेरे बहकनेकी भी अब हद हो गयी है। यह बात स्पष्ट है कि अब तू मरना चाहता है। क्योंकि जो मरना चाहते हैं, वे ही ऐसी बेसिर-पैरकी बातें बका करते हैं॥ १२॥
व्यक्तं त्वं मर्तुकामोऽसि योऽतिमात्रं विकत्थसे।
मुमूर्षूणां हि मन्दात्मन् ननु स्युर्विप्लवा गिरः॥ १२
हिरण्यकशिपुने कहा—रे मन्दबुद्धि! तेरे बहकनेकी भी अब हद हो गयी है। यह बात स्पष्ट है कि अब तू मरना चाहता है। क्योंकि जो मरना चाहते हैं, वे ही ऐसी बेसिर-पैरकी बातें बका करते हैं॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.8.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 849) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/8/12/