श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.8.26

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

तं विक्रमन्तं सगदं गदाधरो

महोरगं तार्क्ष्यसुतो यथाग्रहीत्।

स तस्य हस्तोत्कलितस्तदासुरो

विक्रीडतो यद्वदहिर्गरुत्मतः॥ २६

taṃ vikramantaṃ sagadaṃ gadādharo

mahoragaṃ tārkṣyasuto yathāgrahīt|

sa tasya hastotkalitastadāsuro

vikrīḍato yadvadahirgarutmataḥ|| 26

अर्थ

प्रहार करते समय ही—जैसे गरुड़ साँपको पकड़ लेते हैं, वैसे ही भगवान्‌ने गदासहित उस दैत्यको पकड़ लिया। वे जब उसके साथ खिलवाड़ करने लगे, तब वह दैत्य उनके हाथसे वैसे ही निकल गया, जैसे क्रीडा करते हुए गरुड़के चंगुलसे साँप छूट जाय॥ २६॥✎ 608 609 610 611 612

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (5)
  • #608 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने
  • #609 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने
  • #610 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने
  • #611 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने
  • #612 शब्दोंके बीचका स्थान: नृसिंहभगवान् पर → नृसिंहभगवान्‌पर

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