॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 7.8.39
ते विष्णुपार्षदाः सर्वे सुनन्दकुमुदादयः।
मूर्ध्नि बद्धाञ्जलिपुटा आसीनं तीव्रतेजसम्।
ईडिरे नरशार्दूलं नातिदूरचराः पृथक्॥ ३९
te viṣṇupārṣadāḥ sarve sunandakumudādayaḥ|
mūrdhni baddhāñjalipuṭā āsīnaṃ tīvratejasam|
īḍire naraśārdūlaṃ nātidūracarāḥ pṛthak|| 39
अर्थ
तात! इसी समय ब्रह्मा, इन्द्र, शंकर आदि देवता, ऋषि, पितर, सिद्ध, विद्याधर, महानाग, मनु, प्रजापति, गन्धर्व, अप्सराएँ, चारण, यक्ष, किम्पुरुष, वेताल, सिद्ध, किन्नर और सुनन्द-कुमुद आदि भगवान्के सभी पार्षद उनके पास आये। उन लोगोंने सिरपर अंजलि बाँधकर सिंहासनपर विराजमान अत्यन्त तेजस्वी नृसिंहभगवान्की थोड़ी दूरसे अलग-अलग स्तुति की॥ ३७—३९॥✎ 616