श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.9.4

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

तथेति शनकै राजन्महाभागवतोऽर्भकः।

उपेत्य१ भुवि कायेन ननाम विधृताञ्जलिः॥ ४

tatheti śanakai rājanmahābhāgavato'rbhakaḥ|

upetya bhuvi kāyena nanāma vidhṛtāñjaliḥ|| 4

अर्थ

भगवान्‌के परम प्रेमी प्रह्लाद ‘जो आज्ञा’ कहकर और धीरेसे भगवान्‌के पास जाकर हाथ जोड़ पृथ्वीपर साष्टांग लोट गये॥ ४॥✎ 618

टिप्पणियाँ

  1. १

    प्रा० पा०—उत्पत्य।

    (मुद्रित पृष्ठ 857)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #618 शब्दोंके बीचका स्थान: नृसिंहभगवान् ने → नृसिंहभगवान्‌ने

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