श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.1.12

नवम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

इक्ष्वाकुनृगशर्यातिदिष्टधृष्टकरूषकान्।

नरिष्यन्तं पृ१षध्रं च नभगं च कविं विभुः॥ १२

ikṣvākunṛgaśaryātidiṣṭadhṛṣṭakarūṣakān|

nariṣyantaṃ pṛṣadhraṃ ca nabhagaṃ ca kaviṃ vibhuḥ|| 12

अर्थ

विवस्वान्की संज्ञा नामक पत्‍नीसे श्राद्धदेव मनुका जन्म हुआ। परीक्षित्! परम मनस्वी राजा श्राद्धदेवने अपनी पत्‍नी श्रद्धाके गर्भसे दस पुत्र उत्पन्‍न किये। उनके नाम थे—इक्ष्वाकु, नृग, शर्याति, दिष्ट, धृष्ट, करूष, नरिष्यन्त, पृषध्र, नभग और कवि॥ ११-१२॥

यह अर्थ श्लोक 11–12 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

टिप्पणियाँ

  1. १

    पृथुं वस्वं नाभागं।

    (मुद्रित पृष्ठ 8)

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