आपने कहा कि पिछले कल्पके अन्तमें द्रविड़ देशके स्वामी राजर्षि सत्यव्रतने भगवान्की सेवासे ज्ञान प्राप्त किया और वही इस कल्पमें वैवस्वत मनु हुए। आपने उनके इक्ष्वाकु आदि नरपति पुत्रोंका भी वर्णन किया॥ २-३॥
यह अर्थ श्लोक 2–3 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।
योऽसौ सत्यव्रतो नाम राजर्षिर्द्रविडेश्वरः।
ज्ञानं योऽतीतकल्पान्ते लेभे पुरुषसेवया॥ २
आपने कहा कि पिछले कल्पके अन्तमें द्रविड़ देशके स्वामी राजर्षि सत्यव्रतने भगवान्की सेवासे ज्ञान प्राप्त किया और वही इस कल्पमें वैवस्वत मनु हुए। आपने उनके इक्ष्वाकु आदि नरपति पुत्रोंका भी वर्णन किया॥ २-३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.1.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 7) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/1/2/