ब्रह्मन्! अब आप कृपा करके उनके वंश और वंशमें होनेवालोंका अलग-अलग चरित्र वर्णन कीजिये। महाभाग! हमारे हृदयमें सर्वदा ही कथा सुननेकी उत्सुकता बनी रहती है॥ ४॥
तेषां वंशं पृथग् ब्रह्मन् वंश्यानुचरितानि च।
कीर्तयस्व महाभाग नित्यं शुश्रूषतां हि नः॥ ४
ब्रह्मन्! अब आप कृपा करके उनके वंश और वंशमें होनेवालोंका अलग-अलग चरित्र वर्णन कीजिये। महाभाग! हमारे हृदयमें सर्वदा ही कथा सुननेकी उत्सुकता बनी रहती है॥ ४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.1.4 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 7) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/1/4/