श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.10.16

नवम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

बद‍्ध्वोदधौ रघुपतिर्विविधाद्रिकूटैः

सेतुं कपीन्द्रकरकम्पितभूरुहाङ्गैः।

सुग्रीवनीलहनुमत्प्रमुखैरनीकै-३

र्लङ्कां विभीषणदृशाऽऽविशदग्रदग्धाम्॥ १६

baddhvodadhau raghupatirvividhādrikūṭaiḥ

setuṃ kapīndrakarakampitabhūruhāṅgaiḥ|

sugrīvanīlahanumatpramukhairanīkai-

rlaṅkāṃ vibhīṣaṇadṛśā''viśadagradagdhām|| 16

अर्थ

भगवान् श्रीरामजीने अनेकानेक पर्वतोंके शिखरोंसे समुद्रपर पुल बाँधा। जब बड़े-बड़े बन्दर अपने हाथोंसे पर्वत उठा-उठाकर लाते थे, तब उनके वृक्ष और बड़ी-बड़ी चट्टानें थर-थर काँपने लगती थीं। इसके बाद विभीषणकी सलाहसे भगवान्‌ने सुग्रीव, नील, हनूमान् आदि प्रमुख वीरों और वानरीसेनाके साथ लंकामें प्रवेश किया। वह तो श्रीहनूमान्जीके द्वारा पहले ही जलायी जा चुकी थी॥ १६॥

टिप्पणियाँ

  1. ३

    रनेकै०।

    (मुद्रित पृष्ठ 54)

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