श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.10.18

नवम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

रक्षःपतिस्तदवलोक्य निकुम्भकुम्भ-

धूम्राक्षदुर्मुखसुरान्तनरान्तकादीन् ।

पुत्रं प्रहस्तमतिकायविकम्पनादीन्

सर्वानुगान् समहिनोदथ कुम्भकर्णम्॥ १८

rakṣaḥpatistadavalokya nikumbhakumbha-

dhūmrākṣadurmukhasurāntanarāntakādīn |

putraṃ prahastamatikāyavikampanādīn

sarvānugān samahinodatha kumbhakarṇam|| 18

अर्थ

यह देखकर राक्षसराज रावणने निकुम्भ, कुम्भ, धूम्राक्ष, दुर्मुख, सुरान्तक, नरान्तक, प्रहस्त, अतिकाय, विकम्पन आदि अपने सब अनुचरों, पुत्र मेघनाद और अन्तमें भाई कुम्भकर्णको भी युद्ध करनेके लिये भेजा॥ १८॥

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