भगवान् श्रीरामने विश्वामित्रके यज्ञमें लक्ष्मणके सामने ही मारीच आदि राक्षसोंको मार डाला। वे सब बड़े-बड़े राक्षसोंकी गिनतीमें थे॥ ५॥✎ 878
विश्वामित्राध्वरे येन मारीचाद्या निशाचराः।
पश्यतो लक्ष्मणस्यैव हता नैर्ऋतपुंगवाः॥ ५
भगवान् श्रीरामने विश्वामित्रके यज्ञमें लक्ष्मणके सामने ही मारीच आदि राक्षसोंको मार डाला। वे सब बड़े-बड़े राक्षसोंकी गिनतीमें थे॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.10.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 52) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/10/5/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)