श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.11.18

नवम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

तत ऊर्ध्वं ब्रह्मचर्यं धारयन्‍नजुहोत् प्रभुः।

त्रयोदशाब्दसाहस्रमग्‍निहोत्रमखण्डितम्॥ १८

tata ūrdhvaṃ brahmacaryaṃ dhārayannajuhot prabhuḥ|

trayodaśābdasāhasramagnihotramakhaṇḍitam|| 18

अर्थ

इसके बाद भगवान् श्रीरामने ब्रह्मचर्य धारण करके तेरह हजार वर्षतक अखण्डरूपसे अग्‍निहोत्र किया॥ १८॥

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