इसके बाद महर्षियोंने यह सोचकर कि ‘राजाके न रहनेपर लोगोंमें अराजकता फैल जायगी’ निमिके शरीरका मन्थन किया। उस मन्थनसे एक कुमार उत्पन्न हुआ॥ १२॥
अराजकभयं नॄणां मन्यमाना महर्षयः।
देहं ममन्थुः स्म निमेः कुमारः समजायत॥ १२
इसके बाद महर्षियोंने यह सोचकर कि ‘राजाके न रहनेपर लोगोंमें अराजकता फैल जायगी’ निमिके शरीरका मन्थन किया। उस मन्थनसे एक कुमार उत्पन्न हुआ॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.13.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 68) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/13/12/