श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.13.17

नवम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

कृ४तिरातस्ततस्तस्मान्महारोमाथ तत्सुतः।

स्वर्णरोमा सुतस्तस्य ह्रस्वरोमा व्यजायत॥ १७

kṛtirātastatastasmānmahāromātha tatsutaḥ|

svarṇaromā sutastasya hrasvaromā vyajāyata|| 17

अर्थ

महाधृतिका कृतिरात, कृतिरातका महारोमा, महारोमाका स्वर्णरोमा और स्वर्णरोमाका पुत्र हुआ ह्रस्वरोमा॥ १७॥✎ 1641

टिप्पणियाँ

  1. ४

    विरुतस्तत्सुतस्तस्मा०।

    (मुद्रित पृष्ठ 68)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1641 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: केशि-ध्वज → केशिध्वज

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