खाण्डिक्य था कर्मकाण्डका मर्मज्ञ। वह केशि-ध्वजसे भयभीत होकर भाग गया। केशिध्वजका पुत्र भानुमान् और भानुमान्का शतद्युम्न था॥ २१॥
खाण्डिक्यः कर्मतत्त्वज्ञो भीतः केशिध्वजाद्द्रुतः।
भानुमांस्तस्य पुत्रोऽभूच्छतद्युम्नस्तु तत्सुतः॥ २१
खाण्डिक्य था कर्मकाण्डका मर्मज्ञ। वह केशि-ध्वजसे भयभीत होकर भाग गया। केशिध्वजका पुत्र भानुमान् और भानुमान्का शतद्युम्न था॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.13.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 68) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/13/21/