श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.13.26

नवम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

शुनकस्तत्सुतो जज्ञे वीतहव्यो धृतिस्ततः।

बहुलाश्‍वो धृतेस्तस्य कृतिरस्य महावशी॥ २६

śunakastatsuto jajñe vītahavyo dhṛtistataḥ|

bahulāśvo dhṛtestasya kṛtirasya mahāvaśī|| 26

अर्थ

ऋतका शुनक, शुनकका वीतहव्य, वीतहव्यका धृति, धृतिका बहुलाश्‍व, बहुलाश्‍वका कृति और कृतिका पुत्र हुआ महावशी॥ २६॥

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