॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 9.13.26
शुनकस्तत्सुतो जज्ञे वीतहव्यो धृतिस्ततः।
बहुलाश्वो धृतेस्तस्य कृतिरस्य महावशी॥ २६
śunakastatsuto jajñe vītahavyo dhṛtistataḥ|
bahulāśvo dhṛtestasya kṛtirasya mahāvaśī|| 26
अर्थ
ऋतका शुनक, शुनकका वीतहव्य, वीतहव्यका धृति, धृतिका बहुलाश्व, बहुलाश्वका कृति और कृतिका पुत्र हुआ महावशी॥ २६॥