‘महानुभावो! आपलोग समर्थ हैं। यदि आप प्रसन्न हैं तो राजा निमिका यह शरीर पुनः जीवित हो उठे।’ देवताओंने कहा—‘ऐसा ही हो।’ उस समय निमिने कहा—‘मुझे देहका बन्धन नहीं चाहिये॥ ८॥
राज्ञो जीवतु देहोऽयं प्रसन्नाः प्रभवो यदि।
तथेत्युक्ते निमिः प्राह मा भून्मे देहबन्धनम्॥ ८
‘महानुभावो! आपलोग समर्थ हैं। यदि आप प्रसन्न हैं तो राजा निमिका यह शरीर पुनः जीवित हो उठे।’ देवताओंने कहा—‘ऐसा ही हो।’ उस समय निमिने कहा—‘मुझे देहका बन्धन नहीं चाहिये॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.13.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 67) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/13/8/