श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.14.26

नवम स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

अपश्यन्‍नुर्वशीमिन्द्रो गन्धर्वान् समचोदयत्।

उर्वशीरहितं मह्यमास्थानं नातिशोभते॥ २६

apaśyannurvaśīmindro gandharvān samacodayat|

urvaśīrahitaṃ mahyamāsthānaṃ nātiśobhate|| 26

अर्थ

इधर जब इन्द्रने उर्वशीको नहीं देखा, तब उन्होंने गन्धर्वोंको उसे लानेके लिये भेजा और कहा—‘उर्वशीके बिना मुझे यह स्वर्ग फीका जान पड़ता है’॥ २६॥

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