श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.14.31

नवम स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

ते विसृज्योरणौ तत्र व्यद्योतन्त स्म विद्युतः१।

आदाय मेषावायान्तं न‌ग्‍नमैक्षत सा पतिम्॥ ३१

te visṛjyoraṇau tatra vyadyotanta sma vidyutaḥ|

ādāya meṣāvāyāntaṃ nagnamaikṣata sā patim|| 31

अर्थ

गन्धर्वोंने उनके झपटते ही भेड़ोंको तो वहीं छोड़ दिया और स्वयं बिजलीकी तरह चमकने लगे। जब राजा पुरूरवा भेड़ोंको लेकर लौटे, तब उर्वशीने उस प्रकाशमें उन्हें वस्त्रहीन अवस्थामें देख लिया। (बस, वह उसी समय उन्हें छोड़कर चली गयी)॥ ३१॥

टिप्पणियाँ

  1. १

    विक्षताः।

    (मुद्रित पृष्ठ 73)

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