श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.14.37

नवम स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

स्त्रियो ह्यकरुणाः क्रूरा दु३र्मर्षाः प्रियसाहसाः।

घ्नन्त्यल्पार्थेऽपि विश्रब्धं पतिं भ्रातरमप्युत॥ ३७

striyo hyakaruṇāḥ krūrā durmarṣāḥ priyasāhasāḥ|

ghnantyalpārthe'pi viśrabdhaṃ patiṃ bhrātaramapyuta|| 37

अर्थ

स्त्रियाँ निर्दय होती हैं। क्रूरता तो उनमें स्वाभाविक ही रहती है। तनिक-सी बातमें चिढ़ जाती हैं और अपने सुखके लिये बड़े-बड़े साहसके काम कर बैठती हैं, थोड़े-से स्वार्थके लिये विश्‍वास दिलाकर अपने पति और भाईतकको मार डालती हैं॥ ३७॥✎ 2052 2053

टिप्पणियाँ

  1. ३

    दुर्मुखाः।

     

    (मुद्रित पृष्ठ 73)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #2052 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि
  • #2053 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

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