उन्होंने तीनों लोकोंपर विजय प्राप्त की और राजसूय यज्ञ किया। इससे उनका घमंड बढ़ गया और उन्होंने बलपूर्वक बृहस्पतिकी पत्नी ताराको हर लिया॥ ४॥
सोऽयजद् राजसूयेन विजित्य भुवनत्रयम्।
पत्नीं बृहस्पतेर्दर्पात् तारां नामाहरद् बलात्॥ ४
उन्होंने तीनों लोकोंपर विजय प्राप्त की और राजसूय यज्ञ किया। इससे उनका घमंड बढ़ गया और उन्होंने बलपूर्वक बृहस्पतिकी पत्नी ताराको हर लिया॥ ४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.14.4 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 70) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/14/4/