श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.14.41

नवम स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

उपलभ्य मुदा युक्तः समुवास तया निशाम्।

अथैनमुर्वशी प्राह कृपणं विरहातुरम्॥ ४१

upalabhya mudā yuktaḥ samuvāsa tayā niśām|

athainamurvaśī prāha kṛpaṇaṃ virahāturam|| 41

अर्थ

उर्वशीके मिलनेसे पुरूरवाको बड़ा सुख मिला और वे एक रात उसीके साथ रहे। प्रातःकाल जब वे विदा होने लगे तब विरहके दुःखसे वे अत्यन्त दीन हो गये। उर्वशीने उनसे कहा—॥ ४१॥

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