सत्यवती समस्त लोकोंको पवित्र करनेवाली परम पुण्यमयी ‘कौशिकी’ नदी बन गयी। रेणु ऋषिकी कन्या थी रेणुका। जमदग्निने उसका पाणिग्रहण किया॥ १२॥✎ 879
सा चाभूत् सुमहापुण्या कौशिकी लोकपावनी।
रेणोः सुतां रेणुकां वै जमदग्निरुवाह याम्॥ १२
सत्यवती समस्त लोकोंको पवित्र करनेवाली परम पुण्यमयी ‘कौशिकी’ नदी बन गयी। रेणु ऋषिकी कन्या थी रेणुका। जमदग्निने उसका पाणिग्रहण किया॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.15.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 76) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/15/12/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#879 शब्दोंके बीचका स्थान: कियाथा—फिर → किया था—फिर