त्रिःसप्तकृत्वो य इमां चक्रे निःक्षत्रियां महीम्॥ १४
yamāhurvāsudevāṃśaṃ haihayānāṃ kulāntakam|
triḥsaptakṛtvo ya imāṃ cakre niḥkṣatriyāṃ mahīm|| 14
अर्थ
कहते हैं कि हैहयवंशका अन्त करनेके लिये स्वयं भगवान्ने ही परशुरामके रूपमें अंशावतार ग्रहण किया था। उन्होंने इस पृथ्वीको इक्कीस बार क्षत्रियहीन कर दिया॥ १४॥✎ 879
यमाहुर्वासुदेवांशं हैहयानां कुलान्तकम्।
त्रिःसप्तकृत्वो य इमां चक्रे निःक्षत्रियां महीम्॥ १४
कहते हैं कि हैहयवंशका अन्त करनेके लिये स्वयं भगवान्ने ही परशुरामके रूपमें अंशावतार ग्रहण किया था। उन्होंने इस पृथ्वीको इक्कीस बार क्षत्रियहीन कर दिया॥ १४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.15.14 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 76) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/15/14/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#879 शब्दोंके बीचका स्थान: कियाथा—फिर → किया था—फिर