श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.15.26

नवम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

हविर्धानीमृषेर्दर्पान्‍नरान् हर्तुमचोदयत्।

ते च माहिष्मतीं निन्युः सवत्सां क्रन्दतीं बलात्॥ २६

havirdhānīmṛṣerdarpānnarān hartumacodayat|

te ca māhiṣmatīṃ ninyuḥ savatsāṃ krandatīṃ balāt|| 26

अर्थ

उसने अभिमानवश जमदग्‍नि मुनिसे माँगा भी नहीं, अपने सेवकोंको आज्ञा दी कि कामधेनुको छीन ले चलो। उसकी आज्ञासे उसके सेवक बछड़ेके साथ ‘बाँ-बाँ’ डकराती हुई कामधेनुको बलपूर्वक माहिष्मतीपुरी ले गये॥ २६॥

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