श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.15.3

नवम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

भीमस्तु विजयस्याथ कांचनो होत्रकस्ततः।

तस्य जह्नुः सुतो गंगां गण्डूषीकृत्य योऽपिबत्।

जह्नोस्तु पूरुस्तत्पुत्रो बलाकश्‍चात्मजोऽजकः॥ ३

bhīmastu vijayasyātha kāṃcano hotrakastataḥ|

tasya jahnuḥ suto gaṃgāṃ gaṇḍūṣīkṛtya yo'pibat|

jahnostu pūrustatputro balākaścātmajo'jakaḥ|| 3

अर्थ

विजयका भीम, भीमका कांचन, कांचनका होत्र और होत्रका पुत्र था जह्नु। ये जह्नु वही थे, जो गंगाजीको अपनी अंजलिमें लेकर पी गये थे। जह्नुका पुत्र था पूरु, पूरुका बलाक और बलाकका अजक॥ ३॥

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