जब उसकी बाँहें कट गयीं, तब उन्होंने पहाड़की चोटीकी तरह उसका ऊँचा सिर धड़से अलग कर दिया। पिताके मर जानेपर उसके दस हजार लड़के डरकर भग गये॥ ३५॥
कृत्तबाहोः शिरस्तस्य गिरेः शृंगमिवाहरत्।
हते पितरि तत्पुत्रा अयुतं दुद्रुवुर्भयात्॥ ३५
जब उसकी बाँहें कट गयीं, तब उन्होंने पहाड़की चोटीकी तरह उसका ऊँचा सिर धड़से अलग कर दिया। पिताके मर जानेपर उसके दस हजार लड़के डरकर भग गये॥ ३५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.15.35 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 79) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/15/35/