श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.16.11

नवम स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

दृष्ट्वा‌ग्‍न्यगार आसीनमावेशितधियं मुनिम्।

भगवत्युत्तमश्‍लोके जघ्नुस्ते पापनिश्‍चयाः॥ ११

dṛṣṭvāgnyagāra āsīnamāveśitadhiyaṃ munim|

bhagavatyuttamaśloke jaghnuste pāpaniścayāḥ|| 11

अर्थ

उस समय महर्षि जमदग्‍नि अग्‍निशालामें बैठे हुए थे और अपनी समस्त वृत्तियोंसे पवित्रकीर्ति भगवान्‌के ही चिन्तनमें म‌ग्‍न हो रहे थे। उन्हें बाहरकी कोई सुध न थी। उसी समय उन पापियोंने जमदग्‍नि ऋषिको मार डाला। उन्होंने पहलेसे ही ऐसा पापपूर्ण निश्‍चय कर रखा था॥ ११॥✎ 1643

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1643 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: परशु-रामजीसे → परशुरामजीसे

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