श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.16.13

नवम स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

रेणुका दुःखशोकार्ता निघ्नन्त्यात्मानमात्मना।

राम रामेहि तातेति विचुक्रोशोच्चकैः सती॥ १३

reṇukā duḥkhaśokārtā nighnantyātmānamātmanā|

rāma rāmehi tāteti vicukrośoccakaiḥ satī|| 13

अर्थ

सती रेणुका दुःख और शोकसे आतुर हो गयीं। वे अपने हाथों अपनी छाती और सिर पीट-पीटकर जोर-जोरसे रोने लगीं—‘परशुराम! बेटा परशुराम! शीघ्र आओ’॥ १३॥✎ 1643

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1643 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: परशु-रामजीसे → परशुरामजीसे

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