सती रेणुका दुःख और शोकसे आतुर हो गयीं। वे अपने हाथों अपनी छाती और सिर पीट-पीटकर जोर-जोरसे रोने लगीं—‘परशुराम! बेटा परशुराम! शीघ्र आओ’॥ १३॥✎ 1643
रेणुका दुःखशोकार्ता निघ्नन्त्यात्मानमात्मना।
राम रामेहि तातेति विचुक्रोशोच्चकैः सती॥ १३
सती रेणुका दुःख और शोकसे आतुर हो गयीं। वे अपने हाथों अपनी छाती और सिर पीट-पीटकर जोर-जोरसे रोने लगीं—‘परशुराम! बेटा परशुराम! शीघ्र आओ’॥ १३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.16.13 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 81) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/16/13/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)