श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.16.17

नवम स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

गत्वा माहिष्मतीं रामो ब्रह्मघ्नविहतश्रियम्।

तेषां स शीर्षभी राजन् मध्ये चक्रे महागिरिम्॥ १७

gatvā māhiṣmatīṃ rāmo brahmaghnavihataśriyam|

teṣāṃ sa śīrṣabhī rājan madhye cakre mahāgirim|| 17

अर्थ

परीक्षित्! परशुरामजीने माहिष्मती नगरीमें जाकर सहस्रबाहु अर्जुनके पुत्रोंके सिरोंसे नगरके बीचो-बीच एक बड़ा भारी पर्वत खड़ा कर दिया। उस नगरकी शोभा तो उन ब्रह्मघाती नीच क्षत्रियोंके कारण ही नष्ट हो चुकी थी॥ १७॥

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