tapasā kṣātramutsṛjya yo lebhe brahmavarcasam|| 28
अर्थ
महाराज गाधिके पुत्र हुए प्रज्वलित अग्निके समान परम तेजस्वी विश्वामित्रजी। इन्होंने अपने तपोबलसे क्षत्रियत्वका त्याग करके ब्रह्मतेज प्राप्त कर लिया॥ २८॥
गाधेरभून्महातेजाः समिद्ध इव पावकः।
तपसा क्षात्रमुत्सृज्य यो लेभे ब्रह्मवर्चसम्॥ २८
महाराज गाधिके पुत्र हुए प्रज्वलित अग्निके समान परम तेजस्वी विश्वामित्रजी। इन्होंने अपने तपोबलसे क्षत्रियत्वका त्याग करके ब्रह्मतेज प्राप्त कर लिया॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.16.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 83) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/16/28/