श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.16.30

नवम स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

पुत्रं कृत्वा शुनःशेपं देवरातं च भार्गवम्।

आजीगर्तं सुतानाह ज्येष्ठ एष प्रकल्प्यताम्॥ ३०

putraṃ kṛtvā śunaḥśepaṃ devarātaṃ ca bhārgavam|

ājīgartaṃ sutānāha jyeṣṭha eṣa prakalpyatām|| 30

अर्थ

विश्‍वामित्रजीने भृगुवंशी अजीगर्तके पुत्र अपने भानजे शुनःशेपको, जिसका एक नाम देवरात भी था, पुत्ररूपमें स्वीकार कर लिया और अपने पुत्रोंसे कहा कि ‘तुमलोग इसे अपना बड़ा भाई मानो’॥ ३०॥

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