श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.19.24

नवम स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

आसेवितं वर्षपूगान् षड्वर्गं विषयेषु सः।

क्षणेन मुमुचे नीडं जातपक्ष इव द्विजः॥ २४

āsevitaṃ varṣapūgān ṣaḍvargaṃ viṣayeṣu saḥ|

kṣaṇena mumuce nīḍaṃ jātapakṣa iva dvijaḥ|| 24

अर्थ

यद्यपि राजा ययातिने बहुत वर्षोंतक इन्द्रियोंसे विषयोंका सुख भोगा था—परन्तु जैसे पाँख निकल आनेपर पक्षी अपना घोंसला छोड़ देता है, वैसे ही उन्होंने एक क्षणमें ही सब कुछ छोड़ दिया॥ २४॥

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