श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.19.26

नवम स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

श्रुत्वा गाथां देवयानी मेने प्रस्तोभमात्मनः।

स्त्रीपुंसोः स्नेहवैक्लव्यात् परिहासमिवेरितम्॥ २६

śrutvā gāthāṃ devayānī mene prastobhamātmanaḥ|

strīpuṃsoḥ snehavaiklavyāt parihāsamiveritam|| 26

अर्थ

जब देवयानीने वह गाथा सुनी, तो उसने समझा कि ये मुझे निवृत्तिमार्गके लिये प्रोत्साहित कर रहे हैं। क्योंकि स्त्री-पुरुषमें परस्पर प्रेमके कारण विरह होनेपर विकलता होती है, यह सोचकर ही इन्होंने यह बात हँसी-हँसीमें कही है॥ २६॥

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