श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.2.19

नवम स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

चित्रसेनो नरिष्यन्तादृक्षस्तस्य सुतोऽभवत्।

तस्य मीढ्वांस्ततः कूर्च इन्द्रसेनस्तु तत्सुतः॥ १९

citraseno nariṣyantādṛkṣastasya suto'bhavat|

tasya mīḍhvāṃstataḥ kūrca indrasenastu tatsutaḥ|| 19

अर्थ

मनुपुत्र नरिष्यन्तसे चित्रसेन, उससे ऋक्ष, ऋक्षसे मीढ्वान्, मीढ्वान्से कूर्च और उससे इन्द्रसेनकी उत्पत्ति हुई॥ १९॥

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