॥ श्रीहरिः ॥
वत्सप्रीतेः सुतः प्रांशुस्तत्सुतं प्रमतिं विदुः।
खनित्रः प्रमतेस्तस्माच्चाक्षुषोऽथ विविंशतिः॥ २४
vatsaprīteḥ sutaḥ prāṃśustatsutaṃ pramatiṃ viduḥ|
khanitraḥ pramatestasmāccākṣuṣo'tha viviṃśatiḥ|| 24
अर्थ
वत्सप्रीतिका प्रांशु और प्रांशुका पुत्र हुआ प्रमति। प्रमतिके खनित्र, खनित्रके चाक्षुष और उनके विविंशति हुए॥ २४॥
वत्सप्रीतेः सुतः प्रांशुस्तत्सुतं प्रमतिं विदुः।
खनित्रः प्रमतेस्तस्माच्चाक्षुषोऽथ विविंशतिः॥ २४
वत्सप्रीतिका प्रांशु और प्रांशुका पुत्र हुआ प्रमति। प्रमतिके खनित्र, खनित्रके चाक्षुष और उनके विविंशति हुए॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.2.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 13) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/2/24/