महाराज तृणबिन्दुके अपनी धर्मपत्नीसे तीन पुत्र हुए—विशाल, शून्यबन्धु और धूम्रकेतु। उनमेंसे राजा विशाल वंशधर हुए और उन्होंने वैशाली नामकी नगरी बसायी॥ ३३॥
विशालः शून्यबन्धुश्च धूम्रकेतुश्च तत्सुताः।
विशालो वंशकृद् राजा वैशालीं निर्ममे पुरीम्॥ ३३
महाराज तृणबिन्दुके अपनी धर्मपत्नीसे तीन पुत्र हुए—विशाल, शून्यबन्धु और धूम्रकेतु। उनमेंसे राजा विशाल वंशधर हुए और उन्होंने वैशाली नामकी नगरी बसायी॥ ३३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.2.33 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 14) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/2/33/