श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.2.7

नवम स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

व्याघ्रोऽपि वृक्णश्रवणो निस्त्रिंशाग्राहतस्ततः।

निश्‍चक्राम भृशं भीतो रक्तं पथि समुत्सृजन्॥ ७

vyāghro'pi vṛkṇaśravaṇo nistriṃśāgrāhatastataḥ|

niścakrāma bhṛśaṃ bhīto raktaṃ pathi samutsṛjan|| 7

अर्थ

तलवारकी नोकसे बाघका भी कान कट गया, वह अत्यन्त भयभीत होकर रास्तेमें खून गिराता हुआ वहाँसे निकल भागा॥ ७॥

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