श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.20.17

नवम स्कन्ध · अध्याय 20 · अथ विंशोऽध्यायः

अमोघवीर्यो राजर्षिर्महिष्यां वीर्यमादधे।

श्‍वोभूते स्वपुरं यातः कालेनासूत सा सुतम्॥ १७

amoghavīryo rājarṣirmahiṣyāṃ vīryamādadhe|

śvobhūte svapuraṃ yātaḥ kālenāsūta sā sutam|| 17

अर्थ

राजर्षि दुष्यन्तका वीर्य अमोघ था। रात्रिमें वहाँ रहकर दुष्यन्तने शकुन्तलाका सहवास किया और दूसरे दिन सबेरे वे अपनी राजधानीमें चले गये। समय आनेपर शकुन्तलाको एक पुत्र उत्पन्‍न हुआ॥ १७॥

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