वह बालक भगवान्का अंशांशावतार था। उसका बल-विक्रम अपरिमित था। उसे अपने साथ लेकर रमणीरत्न शकुन्तला अपने पतिके पास गयी॥ १९॥
तं दुरत्ययविक्रान्तमादाय प्रमदोत्तमा।
हरेरंशांशसम्भूतं भर्तुरन्तिकमागमत्॥ १९
वह बालक भगवान्का अंशांशावतार था। उसका बल-विक्रम अपरिमित था। उसे अपने साथ लेकर रमणीरत्न शकुन्तला अपने पतिके पास गयी॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.20.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 97) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/20/19/